गुरू पूर्णिमा पावन पर्व आज, गुरु आशीर्वाद से मिलता फल
गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः
अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है।
गुरु गोविन्द दोऊ खड़े काके लागूं पायें। बलिहारी गुरु आपनो जिन गोविंद दियो बताय।।
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहि। प्रेम गली अति साँकरी, तामे दो न समाहि ।
आज पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्होंने महाभारत और अनेक पुराणों की रचना की।
आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को वेदव्यास जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर गुरुओं की पूजा और सम्मान करने की परंपरा है। शिष्य अपने गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उपवास रखते हैं और विशेष पूजन का आयोजन करते हैं।
कई स्थानों पर हवन-यज्ञ का भी आयोजन किया जाता है। पूजन के समापन पर गुरु की आरती गाई जाती है, जिसमें उनकी महिमा और उपकारों का गुणगान किया जाता है।