15/01/26

जी.एम.एन. कॉलेज में वर्मी कम्पोस्टिंग पर कार्यशाला; विशेषज्ञों ने कहा—पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वरोजगार का भी बड़ा अवसर

जे कुमार अम्बाला छावनी, 15 जनवरी 2026: सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अम्बाला छावनी के जी.एम.एन. कॉलेज में वर्मी कम्पोस्टिंग एवं प्राकृतिक खाद निर्माण पर एक विशेष प्रेरक मार्गदर्शन सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कॉलेज के एसडीजी (SDG), इको क्लब, एनएसएस (NSS) और एनसीसी (NCC) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

शिल्पी एग्रो फाउंडेशन की संचालिका ने साझा किए अनुभव: कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शिल्पी एग्रो फाउंडेशन की संचालिका एवं जानी-मानी पर्यावरण कार्यकर्ता सुश्री पूजा ने शिरकत की। उन्होंने विद्यार्थियों को वर्मी कम्पोस्टिंग की बारीकियों से अवगत कराते हुए बताया कि किस प्रकार कूड़े-कचरे को 'काले सोने' (प्राकृतिक खाद) में बदला जा सकता है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि कैसे निरंतर प्रयासों से एक छोटी सी रुचि को बड़े सामाजिक और पर्यावरणीय अभियान में बदला जा सकता है।

रोजगार का बेहतर साधन है वर्मी कम्पोस्ट: वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप यादव ने सत्र को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण बिंदु रखा। उन्होंने कहा कि "वर्मी कम्पोस्ट न केवल उन्नतशील और जहर-मुक्त खेती के लिए अनिवार्य है, बल्कि यह आज के दौर में युवाओं के लिए रोजगार का भी एक शानदार साधन बन चुका है।" उन्होंने बताया कि कॉलेज इस तरह की कार्यशालाएं निरंतर आयोजित करता रहता है ताकि विद्यार्थी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकें।

प्राचार्य ने की सराहना: महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने सुश्री पूजा के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्राकृतिक खाद का निर्माण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर पर्यावरण संरक्षण जैसे व्यावहारिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं।

सत्र के अंत में एनसीसी कैडेट्स और एनएसएस स्वयंसेवकों सहित सभी विद्यार्थियों ने प्राकृतिक खाद निर्माण की तकनीक को अपनाने और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

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