यमुनानगर: फसल अवशेष जलाने पर किसान के खिलाफ 3 माह बाद FIR दर्ज; 8 कनाल से अधिक जमीन पर जलाई थी पराली
जगाधरी, 12 अगस्त (अन्नू): फसल अवशेष (पराली) जलाने पर लगे प्रतिबंध के बावजूद खेत में आग लगाने के मामले में थाना छप्पर पुलिस ने कार्रवाई की है। घटना के करीब तीन महीने बाद कृषि विभाग की शिकायत पर सोमवार को संबंधित किसान के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
9 मई को सामने आया था मामला; जांच में मिले सबूत
मामले की पृष्ठभूमि: खंड कृषि अधिकारी (जगाधरी) संतोष कुमार ने पुलिस को सौंपी शिकायत में बताया कि तहसील जगाधरी के खुंडेवाला गांव में इसी वर्ष 9 मई को खेत में गेहूं की फसल के अवशेष (पराली) जलाने की सूचना मिली थी।
मौका मुआयना: इसके बाद ग्राम स्तर पर गठित विशेष कमेटी ने मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान गांव के किसान सूरजा राम के खेत में फसल अवशेष जलाने के पुख्ता सबूत पाए गए।
क्षेत्रफल: रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 8 कनाल 19 मरला कृषि भूमि में फसल के अवशेष जलाए गए थे। कृषि विभाग की टीम ने मौके की जीपीएस लोकेशन और खेत के किला नंबर की रिपोर्ट तैयार कर पुलिस को भेजी थी।
रेड एंट्री और भारी जुर्माने का प्रावधान
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार पराली जलाने पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है:
पर्यावरणीय जुर्माना: खेत के क्षेत्रफल के आधार पर उल्लंघनकर्ताओं पर ₹5,000 से लेकर ₹30,000 तक का पर्यावरणीय जुर्माना (Environmental Compensation Fee) लगाने का प्रावधान है।
रेड एंट्री व MSP पर रोक: आरोपी किसान के भूमि रिकॉर्ड और 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल पर 'रेड एंट्री' दर्ज कर दी जाती है। इसके परिणामस्वरूप, संबंधित किसान अगले सीजन तक अपनी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी मंडियों में नहीं बेच पाता है।
पुलिस जांच शुरू
खंड कृषि अधिकारी द्वारा कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दी गई लिखित शिकायत पर थाना छप्पर पुलिस ने आरोपी किसान के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित तथ्यों व दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल की जा रही है।
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