मुलाना: गांव अधोया में विशाल संत सम्मेलन का आयोजन; महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञान नाथ महाराज बोले- 'मुक्ति कर्मकांड से नहीं, ब्रह्मज्ञान से मिलती है'
मुलाना (अंबाला), 17 सितंबर (अन्नू): क्षेत्र के गांव अधोया में आयोजित विशाल संत सम्मेलन में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कार्यक्रम के दौरान निराकारी जागृति मिशन के अध्यक्ष एवं 1008 महामंडलेश्वर एडवोकेट सतगुरु स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने आध्यात्मिक प्रवचन देते हुए मानव जीवन के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मुक्ति कोई भविष्य में घटने वाली घटना नहीं, बल्कि इसी क्षण उपलब्ध होने वाला परम सत्य है, जो बाहरी कर्मकांडों के बजाय केवल ब्रह्मज्ञान से ही संभव है।
संत सम्मेलन, संत प्रवचन और मुख्य बिंदु:
द्रष्टा भाव ही अध्यात्म का गूढ़ रहस्य:
महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने द्रष्टा भाव पर जोर देते हुए कहा कि विचार, इच्छाएं और अपेक्षाएं परिवर्तनशील हैं, लेकिन आत्मा सदैव स्थिर रहती है। स्वयं को इस परिवर्तन का साक्षी (द्रष्टा) बना लेना ही सच्चा अध्यात्म है। उन्होंने नियमित सुरत-शब्द योग के अभ्यास को अध्यात्म की असली कुंजी बताया।
मृत्यु अंत नहीं, मात्र एक परिवर्तन:
सम्मेलन को संबोधित करते हुए महात्मा सुरेश दास ने जीवन-मृत्यु की शाश्वतता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं बल्कि एक स्वरूप परिवर्तन है; सांसों की पूंजी पूरी होते ही हर जीव को यह नश्वर संसार छोड़ना पड़ता है।
मधुमक्खियों की तरह एकजुट रहने का संदेश:
डॉ. बलवंत दौलतपुर ने संगठन और सामाजिक सद्भाव पर बल देते हुए कहा कि मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य ईश्वर प्राप्ति है। हमें मधुमक्खियों की भांति समाज में एकजुट होकर प्रेम और सद्भाव से रहना चाहिए।
विशाल भंडारे का आयोजन:
संत सम्मेलन के समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के गांवों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ उठाया।
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