उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने अमर शहीद वीर दादा कान्हा रावत गौशाला के 45वें वार्षिकोत्सव में की शिरकत
जे कुमार, पलवल, 02 मार्च 2026 : जिला उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने रविवार को गांव बहीन में आयोजित अमर शहीद वीर दादा कान्हा रावत गौशाला के 45वें वार्षिकोत्सव समारोह में शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने वीर दादा कान्हा रावत की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए की। इस मौके पर उपायुक्त डा. वशिष्ठ ने गौशाला का अवलोकन किया और गाय को गुड़ भी खिलाया।
उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि इतने बड़े मेले का दृश्य हमारी सनातन संस्कृति की शान और गौरव का प्रतीक है। जिस प्रकार लोग गौ संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य करते हैं, दान देते हैं और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाते हैं, वह समाज की जागरूकता और समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि गाय हमारे देश की आत्मा, महत्व और गौरव का प्रतीक है तथा उसकी रक्षा के लिए समय-समय पर बलिदान दिए गए हैं।
उन्होंने वीर दादा कान्हा रावत के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने गौ रक्षा के लिए औरंगजेब जैसे तानाशाह का सामना किया और सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत है। उपायुक्त ने गौशाला प्रबंधक समिति की सराहना करते हुए बताया कि यह गौशाला वर्ष 1980 से निरंतर संचालित हो रही है और यहां 1700 से अधिक गौवंश की सेवा की जा रही है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में गौ सेवा का कार्य करना अत्यंत सराहनीय है और संभवत: हरियाणा की चुनिंदा बड़ी गौशालाओं में से एक है।
उन्होंने जानकारी दी कि हरियाणा सरकार समय-समय पर गौशालाओं को अनुदान प्रदान करती रही है। उपायुक्त ने कहा कि यदि गौशाला प्रबंधन की ओर से पशु चिकित्सालय खोलने की मांग आती है तो उसे सरकार के समक्ष विचारार्थ भेजा जाएगा, ताकि गोवंश को समय पर उपचार और बेहतर देखभाल मिल सके। उन्होंने शेड निर्माण, एसपीसीए के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही वैन तथा अन्य विकास कार्यों का भी उल्लेख करते हुए भरोसा दिलाया कि गौशाला की सभी उचित मांगों को सरकार तक पहुंचाकर पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा।
समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि गौ सेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है और गऊ माता की सेवा करना परम धर्म माना गया है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार गाय के लिए दान करे। उन्होंने कहा कि मनुष्य द्वारा गऊ माता के लिए किया गया दान सौ गुना होकर लौटता है और साथ ही पुण्य की प्राप्ति भी होती है।
डा. वशिष्ठ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा इसलिए दिया गया है क्योंकि उसमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है और वह माता की तरह मानव समाज का पालन-पोषण करती है। उन्होंने कहा कि गौशाला में मौजूद गायों के उचित भरण-पोषण, चिकित्सा और देखभाल के लिए समाज का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। सामूहिक प्रयासों से ही गौ संरक्षण के कार्य को मजबूती मिल सकती है।