17/08/26

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने तिरुवरूर स्थित तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की

आरएस अनेजा, 18 अगस्त नई दिल्ली - उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने तिरुवरूर में केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की और स्नातक छात्रों को जीवन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने पर बधाई दी।

सीपी राधाकृष्णन ने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का उत्सव नहीं है, बल्कि शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति, ज्ञान की खोज और समर्पण, दृढ़ता और सुदृढ़शीलता का उत्सव है जिसने छात्रों को इस महत्वपूर्ण क्षण तक पहुंचाया है।

उन्होंने डिग्री हासिल करने वाले छात्रों के माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी और कहा कि उन्होंने अपने बच्चों व छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपने वर्तमान के कई सुख-सुविधाओं का त्याग किया है।

सीपी राधाकृष्णन ने तिरुवरूर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भव्य त्यागराज मंदिर वाला यह पवित्र नगर सदियों से आध्यात्मिकता, विद्वत्ता और कलात्मक उत्कृष्टता का केंद्र रहा है।

उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि ने संतों, विद्वानों और कर्नाटक संगीत की पौराणिक त्रिमूर्ति को जन्म दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि सच्ची महानता तभी उभरती है जब संस्कृति, ज्ञान और मूल्य एक साथ फलते-फूलते हैं।

उपराष्ट्रपति ने पिछले बारह वर्षों में उच्च शिक्षा के अभूतपूर्व विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देशभर में दीक्षांत समारोहों में वे अक्सर पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा डिग्री और पदक प्राप्त करते हुए देखते हैं जो कि स्वागत योग्य है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज शिक्षा का मूल्यांकन केवल परीक्षाओं या अंकों के आधार पर नहीं किया जा सकता है। इसका आकलन स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रभावी ढंग से संवाद करने, सहयोगात्मक रूप से काम करने और जीवन भर सीखते रहने की क्षमता के आधार पर किया जाना चाहिए।

उन्होंने बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और मूल्य आधारित शिक्षा पर बल देकर इस दृष्टिकोण को अपनाने के लिए तमिलनाडु के केंद्रीय विश्वविद्यालय की सराहना की।

संसद द्वारा हाल ही में पारित सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकना और छात्रों के हितों की रक्षा करना सर्वोपरि महत्व रखता है।

झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए, श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान झारखंड सरकार द्वारा इसी तरह का एक विधेयक पारित किया गया था और तत्कालीन राज्यपाल के रूप में उन्होंने तुरंत इस पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दिया था।

उन्होंने कहा, कि अच्छे लोगों के हितों की रक्षा के लिए समाज के बुरे तत्वों को दंडित किया जाना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और अखंडता की रक्षा के लिए कड़े उपायों की आवश्यकता पर बल दिया।

उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से आग्रह किया कि वे ज्ञान के उपभोक्ता बनने के बजाय निर्माता बनें, नकल करने वालों के बजाय नवप्रवर्तक बनें और अनुयायियों के बजाय नेता बनें।

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