जनहित और विकास योजनाओं से जुड़े प्रकरणों की न्यायालय में प्राथमिकता से की जाए प्रभावी पैरवी, आमजन को समय पर मिले राहत
एन.एस. बाछल, 19 मई, जयपुर।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की 8 करोड़ जनता के समग्र कल्याण के लिए समर्पण भाव से कार्य कर रही है। हम राज्य की चहुंमुखी प्रगति के लिए जनकल्याणकारी विकास योजनाओं का निर्बाध संचालन सुनिश्चित कर रहे हैं। इनमें विधिक कारणों से किसी प्रकार की रूकावट ना आए इसके लिए राज्य सरकार द्वारा न्यायालयों में लंबित मामलों में प्रभावी रूप से पक्ष रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आमजन को समय पर राहत मिले और सरकार पर उनका भरोसा और अधिक मजबूत हो इसके लिए सभी अधिकारीगण अपने कर्तव्यों का जिम्मेदारीपूर्ण निर्वहन करें। भजनलाल शर्मा ने कहा कि विधिक कार्यों में राज्य सरकार की ओर से संसाधनों की किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
भजनलाल शर्मा रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर न्यायालयों में लंबित विभिन्न विभागों से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आमजन का हित ही हमारी प्रमुख प्राथमिकता है। इसलिए जनकल्याण से जुड़े प्रकरणों की न्यायालयों में प्राथमिकता से पैरवी की जाए। ऐसे महत्वपूर्ण प्रकरणों में राज्य सरकार की तरफ से प्रभावी ढंग से पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता स्तर पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नियुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन प्रकरणों में उच्चस्थ अदालतों में अपील की आवश्यकता हो उनमें राज्य सरकार की ओर से समय पर अपील की जाए।
लंबित प्रकरणों की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग हो सुनिश्चित-
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों में विभाग की तरफ से नियुक्त अधिकारीगण प्रकरणों की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग करना सुनिश्चित करें। ये अधिकारी न्यायालय में पैरवी के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिवक्ता के साथ निरंतर संपर्क में रहते हुए उन्हें आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध करवाएं जिससे इन प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण हो सके। उन्होंने विभागों के शासन सचिवों को निर्देश दिए कि इस कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्चाधिकारी स्वयं भी नियमित रूप से अधिवक्ताओं के साथ चर्चा कर प्रकरण से संबंधित विभिन्न पहलूओं से उन्हें अवगत कराएं।
पेंडेंसी कम करने के लिए समयबद्ध लक्ष्य तय कर की जाए कार्यवाही-
भजनलाल शर्मा ने कहा कि न्यायालय में विचाराधीन ऐसे मामले जो एक से अधिक विभागों से संबंधित हैं उनके लिए संबंधित विभाग आपसी सहयोग एवं निरंतर समन्वय के साथ विधिक कार्यवाही करें। इसके लिए सक्षम स्तर पर नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए जो इन विभागों और राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिवक्ता के साथ आपसी समन्वय बनाकर कार्य को गति दें। भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर पर भी समन्वय हेतु अधिकारियों को नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोर्ट केसेज की पेंडेंसी कम करने के लिए समयबद्ध लक्ष्य तय कर कार्यवाही की जाए। विभाग पेंडिंग केसेज को प्राथमिकता के आधार पर श्रेणीवार विभाजित करें और और अधिक महत्वपूर्ण मामलों में त्वरित कार्यवाही करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन प्रकरणों में भी विभागीय अधिकारी संबंधित अधिवक्ताओं के साथ वीसी के माध्यम से नियमित बैठक कर चर्चा करें और उन्हें पूरा सहयोग करें।
भर्ती संबंधी प्रकरणों का विधिक परीक्षण कर शीघ्र करें निस्तारण-
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाना सरकार का लक्ष्य है। इसलिए न्यायालय में लंबित भर्ती संबंधी प्रकरणों का विधिवत परीक्षण करवाकर उनका शीघ्र निस्तारण करवाया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर भी नियम बनाते समय विस्तृत विधिक परामर्श लिया जाए जिससे भर्ती प्रक्रिया निर्बाध रूप से संपन्न हो सके। श्री शर्मा ने कहा कि विकास योजनाओं से संबंधित भूमि के लंबित प्रकरणों में अदालत से हुए स्थगन आदेशों को प्रभावी पैरवी के साथ निरस्त करवाया जाए जिससे इन प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया जा सके।
इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत, पुलिस महानिदेशक यू आर साहू, महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद, विभिन्न अतिरिक्त महाधिवक्तागण एवं संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे। सर्वोच्च न्यायालय में राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता वीसी के माध्यम से बैठक से जुड़े।