जी.एम.एन. कॉलेज में फसल अवशेष प्रबंधन पर जागरूकता कार्यक्रम: पराली न जलाने और मृदा संरक्षण का दिया संदेश
जे कुमार अम्बाला कैंट, 4 फरवरी 2026: पर्यावरण संरक्षण और कृषि सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए गांधी मेमोरियल नेशनल (जी.एम.एन.) कॉलेज, अम्बाला कैंट में 'फसल अवशेष प्रबंधन' (Crop Residue Management) विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) अम्बाला, एनएसएस यूनिट और कॉलेज के बॉटनी, जूलॉजी व केमिस्ट्री विभागों के संयुक्त तत्वाधान में संपन्न हुआ।
वैज्ञानिक प्रबंधन और पर्यावरणीय दुष्प्रभाव कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कृषि विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. उपासना सिंह ने शिरकत की। उन्होंने विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों को बताया कि पराली जलाने से न केवल वातावरण में जहरीला धुआं फैलता है जिससे श्वसन संबंधी बीमारियां बढ़ती हैं, बल्कि इससे मिट्टी के मित्र कीट मर जाते हैं और मृदा की प्राकृतिक उर्वरता भी नष्ट होती है। वहीं, परियोजना नोडल अधिकारी डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह ने पराली प्रबंधन के आधुनिक विकल्पों जैसे हैप्पी सीडर का उपयोग, मल्चिंग और कम्पोस्ट खाद बनाने की तकनीक पर विस्तार से जानकारी दी।
विद्यार्थियों की रचनात्मक भागीदारी जागरूकता अभियान के तहत विद्यार्थियों के लिए ड्राइंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसमें छात्र-छात्राओं ने कला के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और 'पराली न जलाने' के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा अभियान के प्रचार-प्रसार हेतु सहभागी विद्यार्थियों को बैग, टी-शर्ट और कैप वितरित किए गए ताकि वे समाज में पर्यावरण दूत के रूप में कार्य कर सकें।
प्राचार्य का संबोधन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने कृषि विज्ञान केंद्र की टीम का स्वागत करते हुए कहा कि विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए इस विषय की वैज्ञानिक समझ होना अनिवार्य है। उन्होंने जोर दिया कि युवा पीढ़ी किसानों और ग्रामीणों को पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों के प्रति जागरूक कर पर्यावरण को बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने इस सराहनीय आयोजन के लिए सभी संबंधित विभागों और एनएसएस यूनिट के प्रयासों की प्रशंसा की।
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