फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर उपमंडल स्तर पर हुई अहम बैठक, दी गई सीआरएम एप्लीकेशन की ट्रेनिंग
जे कुमार, बराड़ा 10 अक्टूबर — लघु सचिवालय, बराड़ा के सभागार में आज एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ. शेखर कुमार ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य कृषि अवशेषों के प्रबंधन हेतु सीआरएम एप्लीकेशन का प्रशिक्षण देना तथा क्षेत्रीय स्तर पर पटवारियों व ग्राम सचिवों को उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करना। इस अवसर पर खंड क़ृषि अधिकारी बराड़ा रवि कांत, खंड बराड़ा के सभी पटवारी, ग्राम सचिव, कृषि विभाग के प्रतिनिधि, एवं अन्य संबद्ध अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में डॉ. शेखर कुमार ने सभी पटवारियों और ग्राम सचिवों को कहा कि वे अपने-अपने कार्य क्षेत्र गांवों में जाकर किसानों से संपर्क करें और उन्हें सीआरएम से संबंधित जानकारी दें। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करें कि किसी भी खेत में फसलों के अवशेष जलाने की घटना न हो।
डॉ. शेखर कुमार ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक करने की आवश्यकता पर बल देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर यह सुनिश्चित करें कि फसल के अवशेषों का निपटान इन-सीटू अथवा एक्स-सीटू विधियों के माध्यम से किया हो, वास्तविक लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो सरकार की हिदायतों का पालन करेंगे और पराली को जलाने की बजाय वैज्ञानिक तरीकों से उसका निपटान करेंगे। पटवारियों और ग्राम सचिवों की यह जिम्मेदारी है कि वे इन दावों की मौके पर जाकर पुष्टि करें और सीआरएम एप्लीकेशन पर सटीक एवं सत्यापित जानकारी दर्ज करें तभी सरकार द्वारा किसानों को प्रति एकड़ 1200 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जायेगी। उन्होंने बताया कि सीआरएम एप्लीकेशन के माध्यम से डाटा एकत्रित कर विभाग द्वारा अनुदान की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान पराली जलाता है तो उसे 5,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ेगा। इसके अलावा, एफआईआर दर्ज की जाएगी और रिकार्ड में रेड एंट्री की जाएगी, जिससे भविष्य में किसान को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले सकेंगे। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि वे योजनाओं का लाभ उठाएं और प्रशासन का सहयोग करें ताकि हरियाणा को पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से मुक्त किया जा सके।
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