अंबाला: साहित्य सुरभि मंच ने आयोजित की साहित्यिक गोष्ठी; वर्षा ऋतु, मां-बाप और पौराणिक प्रसंगों पर कवियों ने बांधा समां
अंबाला, 27 जुलाई (अन्नू): साहित्य सुरभि मंच की ओर से रविवार को अंबाला छावनी के एक निजी रेस्तरां में साहित्यिक गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। यह साहित्यिक संगोष्ठी डॉ. शशी धमीजा की अध्यक्षता और विजय गुप्ता के निर्देशन में संपन्न हुई, जिसमें स्थानीय और बाहर से आए साहित्यकारों ने अपनी कविताओं, गीतों और विचारों से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
साहित्यिक प्रस्तुतियां और मुख्य आकर्षण:
वर्षा ऋतु और पौराणिक प्रसंग:
गोष्ठी का शुभारंभ संगीता सूद ने वर्षा ऋतु के सौंदर्य को महाभारत के प्रसंग से जोड़कर किया।
गुरुग्राम से विशेष रूप से पधारीं सुशील आनंद ने वर्षा ऋतु पर मधुर गीत गाकर सभी को नई मिट्टी की भीनी-भीनी खुशबू का अहसास कराया।
इंदु गुप्ता ने द्रौपदी और श्री कृष्ण के अटूट विश्वास तथा प्रेम के पवित्र बंधन को दर्शाती भावनात्मक कविता प्रस्तुत की।
हरियाणवी संस्कृति और मातृत्व-पितृत्व को समर्पित रचनाएं:
डॉ. भारती बंधु ने अपनी सुरीली आवाज में हरियाणवी गीत प्रस्तुत कर सभी की ताली बटोरी।
डॉ. अनुपमा आर्य ने अपनी दिवंगत मां की सुखद स्मृतियों को समर्पित भावुक कविता पढ़कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
रुचि शर्मा ने मां को जीवन का सर्वश्रेष्ठ वरदान और पिता के मौन त्याग को अमूल्य बताते हुए समाज हित में काम करने का संदेश दिया।
जीवन मूल्य और प्रकृति का संदेश:
मंजू नांदरा ने अपने वक्तव्य में प्रकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा शिक्षक बताया।
पूनम खुराना ने अपने आलेख में त्याग, समर्पण, संतोष और सहनशीलता को मानव जीवन का सबसे अनमोल आभूषण करार दिया।
कार्यक्रम के अंत में मंच के पदाधिकारियों ने सभी रचनाकारों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया।
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