अम्बाला: संस्कृति गरिमा मंच की बैठक संपन्न; वैशाखी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर हुई चर्चा
जे कुमार अम्बाला छावनी, 12 अप्रैल 2026: संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से संस्कृति गरिमा मंच की कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक आज आर्य समाज मंदिर के प्रांगण में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मंच की उप-प्रधान संतोष धीर ने की, जिसमें आगामी त्योहारों और सामाजिक गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की गई।
वैशाखी के महत्व पर प्रकाश:
बैठक के दौरान मुख्य वक्ता डॉ. शशि धमीजा ने 'वैशाखी' पर्व के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वैशाखी न केवल रबी की फसल पकने की खुशी का प्रतीक है, बल्कि इसी दिन गुरु गोविंद सिंह जी ने 'खालसा पंथ' की स्थापना कर समाज को वीरता और एकता का संदेश दिया था। उन्होंने युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और इन त्योहारों के पीछे छिपे वैज्ञानिक व आध्यात्मिक कारणों को समझने पर जोर दिया।
सांस्कृतिक गतिविधियों पर मंथन:
उप-प्रधान संतोष धीर ने अपने संबोधन में कहा कि मंच का मुख्य उद्देश्य समाज में नैतिक मूल्यों का उत्थान करना है। बैठक में कार्यकारिणी के सदस्यों ने आगामी कार्यक्रमों के सफल आयोजन हेतु अपने सुझाव साझा किए। इस अवसर पर वक्ताओं ने सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति के गौरव को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लिया।
बैठक में मंच के अन्य पदाधिकारी और सदस्य भी उपस्थित रहे, जिन्होंने समाज सेवा और सांस्कृतिक जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने पर सहमति जताई।
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