अंबाला: खतौली मोड़ पर कबीर जयंती धूमधाम से मनाई; संत सम्मेलन में उमड़ी संगत
अंबाला, 07 जुलाई, (अन्नू): अंबाला-नारायणगढ़ रोड स्थित गांव खतौली मोड़ के निराकारी जागृति मिशन आश्रम में सतगुरुदेव कबीर साहेब की पावन जयंती अत्यंत धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर भव्य संत सम्मेलन और अटूट भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत कर गुरु महिमा का गुणगान किया।
संत रामसिंह महाराज के रुहानी प्रवचनों से निहाल हुई संगत
धार्मिक कार्यक्रम में माई देवा शक्तिपीठ दरबार झरमड़ी के पीठाधीश्वर संत रामसिंह महाराज मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने रुहानी व अनमोल प्रवचनों से पंडाल में मौजूद भारी संगत को निहाल किया। आश्रम पहुंचने पर गद्दीनशीन महामंडलेश्वर एडवोकेट सतगुरु स्वामी ज्ञान नाथ महाराज व मिशन के अन्य पदाधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत व अभिनंदन किया।
भजनों की अमृत वर्षा और आदि धर्म मिशन की विचारधारा पर चर्चा
भजनों से मिला आत्मिक आनंद: कार्यक्रम के दौरान मशहूर गायक महात्मा सुरप्रीत सन्नी ने अपनी मधुर आवाज में कबीर साहेब के भजनों की ऐसी अमृत वर्षा की कि उपस्थित श्रद्धालु आत्मिक आनंद से सराबोर हो गए।
पगड़ी पहनाकर किया सम्मान: महात्मा प्रवीन मंडौर ने ऑल इंडिया आदि धर्म मिशन की पावन विचारधारा से संगत को विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने कबीर साहेब के वचनों और संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इस दौरान मिशन कार्यकारिणी द्वारा महात्मा प्रवीन को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया और विचारधारा के प्रचार-प्रसार की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई।
कबीर साहेब ने किया पाखंड और जातिवाद का खंडन: स्वामी ज्ञान नाथ
संगत को संबोधित करते हुए महामण्डलेश्वर स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने कहा कि कबीर साहेब एक उच्च कोटि के तत्ववेत्ता, महान समाज सुधारक और अध्यात्म के सिरमौर थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में समाज में व्याप्त पाखंड, रूढ़िवादिता, अंधविश्वास, जातिवाद और ऊंच-नीच के भेदभाव का कड़ा खंडन किया।
स्वामी जी ने कबीर साहेब के प्रसिद्ध दोहे "कबीरा कुंआ एक है, पानी भरे अनेक..." का उदाहरण देते हुए समझाया कि ईश्वर की विशुद्ध चेतनधारा हर प्राणी में एक समान विद्यमान है, इसलिए मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उन्होंने जीवन में तत्ववेत्ता सतगुरु के महत्व को परमात्मा से भी श्रेष्ठ बताया।
ज्ञान दीक्षा और अटूट भंडारे के साथ समापन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में समागम में पहुंचे सभी पूजनीय संत-महापुरुषों को स्मृति चिन्ह व सिरोपा भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया गया। इसके बाद जिज्ञासु श्रद्धालुओं को कल्याण के मार्ग पर अग्रसर करने के लिए 'ज्ञान दीक्षा' दी गई। कार्यक्रम के समापन पर पंडाल में अटूट भंडारा बरताया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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