11/05/26

अंबाला: आध्यात्मिक चेतना का संचार: स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने बताया मन पर विजय पाने का मार्ग

अंबाला, 11 मई (अन्‍नू): अंबाला में संत निर्मल दास महाराज के 48वें जन्मोत्सव के अवसर पर एक भव्य संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस समागम में मुख्य वक्ता के रूप में पधारे महामंडलेश्वर एडवोकेट स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। अपने संबोधन में स्वामी जी ने मन की सूक्ष्म परतों को खोलते हुए कहा कि मन ही वह शक्ति है जो मनुष्य को संसार के बंधनों में जकड़ सकती है और यही वह माध्यम है जो मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करता है। उन्होंने समझाया कि अशांत और चंचल मन व्यक्ति को वर्तमान क्षण के आनंद से दूर ले जाकर अतीत की कड़वाहट और भविष्य की काल्पनिक चिंताओं में उलझाए रखता है।


द्रष्टा बनने की कला और साधना का महत्व

स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने जीवन दर्शन को स्पष्ट करते हुए एक महत्वपूर्ण सूत्र दिया कि हमें अपने विचारों का 'दृश्य' नहीं, बल्कि 'द्रष्टा' (साक्षी) बनना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब हम विचारों के पीछे भागना बंद कर देते हैं और उन्हें तटस्थ होकर देखने लगते हैं, तभी हम साधना के वास्तविक मार्ग पर अग्रसर होते हैं। स्वामी जी के अनुसार, मन का गुलाम होने के बजाय उसका मालिक बनना ही मनुष्य की सबसे बड़ी विजय है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि वे ध्यान और साधना के माध्यम से अपने भीतर के कोलाहल को शांत करें।



अहंकार त्याग और स्वीकार भाव ही तृप्ति का मार्ग

सम्मेलन के दौरान स्वामी जी ने सामाजिक और व्यक्तिगत शांति के लिए अहंकार के त्याग को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि दूसरों से अपनी तुलना करना ही अशांति की जड़ है। यदि मनुष्य 'अहोभाव' (कृतज्ञता) और 'स्वीकार भाव' को अपने जीवन का हिस्सा बना ले, तो उसे आत्म-तृप्ति प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता। दूसरों के प्रति द्वेष और स्वयं के अहंकार को छोड़कर ही हम मानवता और आध्यात्मिकता के शिखर तक पहुँच सकते हैं। इस आध्यात्मिक सत्संग ने वहाँ मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं को जीवन जीने की एक नई दृष्टि प्रदान की।



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