अम्बाला: कड़ाके की ठंड में रेलवे स्टेशन पर लकवाग्रस्त मिले थे धर्मपाल, आश्रम की सेवा से 5 महीने बाद लौटी याददाश्त और बेटों से हुआ मिलन

अम्बाला, 27 जून (अन्‍नू): अंबाला में इंसानियत और निस्वार्थ सेवा की एक ऐसी भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जिसने एक परिवार की खोई हुई खुशियां वापस लौटा दी हैं। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर कड़ाके की ठंड में लावारिस और बेहद दयनीय हालत में मिले लकवाग्रस्त बुजुर्ग धर्मपाल को 'अपना घर आश्रम' की टीम ने पांच महीने की अथक सेवा और उपचार के बाद उनके बेटों से मिला दिया है। अपनों को दोबारा सामने पाकर बुजुर्ग की आंखों से आंसू छलक पड़े।

कड़ाके की ठंड में लावारिस हालत में मिले थे धर्मपाल

जानकारी के अनुसार, बीती 16 फरवरी 2026 की कड़कड़ाती ठंड की शाम को 'अपना घर आश्रम' अंबाला की रेस्क्यू टीम को अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर एक बुजुर्ग लावारिस हालत में पड़े हुए मिले थे। वह शारीरिक रूप से लकवाग्रस्त (Paralyzed) थे और मानसिक रूप से भी इतने अस्वस्थ थे कि अपना नाम-पता या कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे। आश्रम की टीम उन्हें तुरंत रेस्क्यू कर अपने साथ ले आई।

चार महीने की फिजियोथेरेपी और सेवा से चमका चमत्कार

आश्रम में लाने के बाद डॉक्टरों और सेवादारों की टीम ने धर्मपाल को एक नया जीवन देने का संकल्प लिया। आश्रम में उनकी दिन-रात सेवा की गई। लगातार चार महीने तक चले उचित मेडिकल उपचार, नियमित फिजियोथेरेपी और सेवादारों की अटूट देखभाल का असर आखिरकार रंग लाया। धीरे-धीरे उनके स्वास्थ्य में सुधार होने लगा और मानसिक स्थिति ठीक होने के साथ ही उनकी खोई हुई याददाश्त वापस लौट आई।

काउंसलिंग में खुला याददाश्त का राज, बेटों के नाम आए सामने

बीती 20 जून को जब आश्रम की टीम द्वारा धर्मपाल की नियमित काउंसलिंग की जा रही थी, तो उन्होंने अपनी धुंधली यादों को समेटते हुए डॉक्टरों को चौंका दिया। उन्होंने अपना नाम धर्मपाल बताया और साफ शब्दों में कहा कि वह कुरुक्षेत्र जिले के शाहबाद के पास स्थित गांव त्योडी के रहने वाले हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने दो बेटों—राजेश और राकेश का नाम भी लिया।

जैसे ही आश्रम प्रबंधन को यह पुख्ता जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत कुरुक्षेत्र के शाहबाद स्थित गांव त्योडी में संपर्क साधा और परिजनों को धर्मपाल के सुरक्षित होने की सूचना दी। पिता के जिंदा और सुरक्षित होने की खबर मिलते ही दोनों बेटे राजेश और राकेश तुरंत अंबाला सिटी स्थित 'अपना घर आश्रम' पहुंचे। पांच महीने बाद जब बेटों ने अपने पिता को सही-सलामत और अपने पैरों पर खड़े होने की स्थिति में देखा, तो वे आश्रम के सेवादारों का धन्यवाद करते नहीं थक रहे थे। आश्रम ने सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद धर्मपाल को सकुशल उनके बेटों के सुपुर्द कर दिया।

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