04/04/26

अम्बाला: आर्य कॉलेज में वैदिक हवन के साथ 'नवीनीकृत ऑडिटोरियम' का शुभारंभ; डॉ. अंजु बाला ने बताया भारतीय संस्कृति की धरोहर

जे कुमार अम्बाला छावनी, 4 अप्रैल 2026: स्थानीय आर्य कॉलेज के प्रांगण में आज वैदिक परंपराओं के अनुसार भव्य हवन एवं प्रार्थना का आयोजन किया गया। 'वैदिक हवन और प्रार्थना अध्ययन केंद्र' के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम विशेष रूप से कॉलेज ऑडिटोरियम के नवीनीकरण (Renovation) के उपरांत उसके औपचारिक उद्घाटन के अवसर पर रखा गया। मंत्रोच्चारण की गूँज और आहुतियों के साथ कॉलेज परिसर का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा।

विश्व शांति और छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना: कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या डॉ. अंजु बाला की उपस्थिति में वैदिक ऋचाओं के साथ हुआ। इस पवित्र यज्ञ में कॉलेज के समस्त स्टाफ सदस्यों और छात्राओं ने पूर्ण श्रद्धा के साथ भाग लिया। हवन के माध्यम से न केवल संस्थान की प्रगति, बल्कि विश्व शांति, समृद्धि और छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए विशेष मंगल कामना की गई। संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. सोनिया शास्त्री ने इस अनुष्ठान में 'यज्ञपति' की मुख्य भूमिका निभाई और यज्ञ की वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला।

नैतिक मूल्यों और पर्यावरण शुद्धि का संदेश: प्राचार्या डॉ. अंजु बाला ने संबोधित करते हुए कहा कि हवन भारतीय संस्कृति की वह अमूल्य धरोहर है, जो पर्यावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ हमारी आत्मा और मन को भी शांति प्रदान करती है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा के साथ-साथ ऐसे आध्यात्मिक आयोजन विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक सोच का संचार करते हैं। वैदिक यज्ञ परंपरा हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराती है और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

सामूहिक सहभागिता और प्रसाद वितरण: समारोह में कॉलेज के टीचिंग, नॉन-टीचिंग स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सभी ने सामूहिक रूप से आहुतियां डालीं और कॉलेज की निरंतर उन्नति का संकल्प लिया। कार्यक्रम का विधिवत समापन शांतिपाठ के साथ हुआ, जिसके उपरांत उपस्थित सभी जनों के बीच प्रसाद वितरित किया गया। ऑडिटोरियम के इस नए स्वरूप के साथ आर्य कॉलेज ने अपनी शैक्षणिक यात्रा में एक और आधुनिक अध्याय जोड़ लिया है।

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