07/04/26

अम्बाला: शोध पत्र लेखन पर आर्य कॉलेज में कार्यशाला; डॉ. अंजु बाला ने बताया नवाचार और समाज विकास का सशक्त माध्यम

जे कुमार अम्बाला: शोध पत्र लेखन पर आर्य कॉलेज में कार्यशाला; डॉ. अंजु बाला ने बताया नवाचार और समाज विकास का सशक्त माध्यम

अम्बाला छावनी, 7 अप्रैल 2026: शोध और अनुसंधान के क्षेत्र में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से आर्य कॉलेज, अम्बाला छावनी के पुस्तकालय विभाग द्वारा एम.कॉम के छात्रों के लिए 'शोध पत्र लेखन' (Research Paper Writing) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य विद्यार्थियों को शोध की वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रक्रिया से रूबरू करवाना था, ताकि वे भविष्य में अकादमिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

मौलिकता और तार्किक प्रस्तुति पर जोर:

कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) अंजु बाला के संबोधन से हुआ। उन्होंने वाणिज्य के विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में शोध पत्र लेखन केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान के सृजन और नवाचार का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने शोध में मौलिकता बनाए रखने, प्रासंगिक विषयों का चयन करने और विचारों को तार्किक एवं प्रमाणिक ढंग से प्रस्तुत करने की सलाह दी। डॉ. बाला ने जोर देकर कहा कि ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों के बौद्धिक और अनुसंधानात्मक कौशल को निखारने में मील का पत्थर साबित होती हैं।

शोध प्रक्रिया की चरणबद्ध जानकारी:

कार्यशाला के मुख्य सत्र में पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. प्रिया शर्मा ने शोध पत्र लेखन की पूरी प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने विषय चयन से लेकर शोध प्रविधि (Methodology), डाटा विश्लेषण, सारांश और संदर्भ लेखन (Referencing) जैसे महत्वपूर्ण चरणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. शर्मा ने साहित्यिक चोरी (Plagiarism) से बचने के उपायों और 'गूगल स्कॉलर' व 'शोधगंगा' जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के सही उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राथमिक और द्वितीयक डेटा का सही संतुलन ही शोध को विश्वसनीय बनाता है।

इस ज्ञानवर्धक सत्र में लगभग 32 विद्यार्थियों सहित डॉ. प्रगति शर्मा, श्रीमती सोनाली और श्रीमती रेखा जैसे शिक्षकगण उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने प्रश्न-उत्तर सत्र के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया और इस कार्यशाला को उच्च शिक्षा की दिशा में अत्यंत उपयोगी बताया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में पुस्तकालय स्टाफ मुकेश कुमार और कुमारी नीशू का विशेष सहयोग रहा।

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