22/02/25

38वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला: पश्चिम बंगाल से ट्रेसिंग पेपर पर काम शुरू करने वाली अंजुमनारा बेगम बनीं महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा

चंडीगढ़, 22 फरवरी (अभी) - 38वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में पश्चिम बंगाल की अंजुमनारा बेगम महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गई हैं। वह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा कर रही हैं।

वर्ष 2002 में मात्र 17 वर्ष की उम्र में अंजुमनआरा ने पटना में आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी में भाग लिया, जहां उनके बुनाई कौशल को मान्यता मिली। इससे प्रेरित होकर उन्होंने अपनी मां के पदचिन्हों पर चलते हुए खादी के कपड़े के व्यवसाय को अपना पेशा बना लिया। आज उनके हाथ से बने कपड़े न केवल भारत में बिकते हैं, बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, ईरान, इराक और अन्य देशों में भी निर्यात किए जाते हैं। सूरजकुंड मेले में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करके उन्हें गर्व महसूस होता है।

अपने गांव में अंजुमनारा ने 10 महिलाओं के साथ एक छोटा सा व्यवसाय शुरू किया, जिसमें महिलाओं के कपड़े, चादरें, दीवार पर लटकाने वाली वस्तुएं, कुर्तियां, जैकेट और कपड़े से बने सजावटी सामान बनाना और बेचना शामिल था।

अंजुमनआरा ने आगे बताया कि उन्होंने 13 साल पहले एक ग्रामीण बैंक से 10,000 रुपये का लोन लिया था, ताकि सुई और धागे का इस्तेमाल करके ट्रेसिंग पेपर और फैब्रिक फ्रेम पर कढ़ाई का काम शुरू कर सकें। उन्होंने समय पर लोन चुकाया और बाद में 25,000 रुपये का लोन लिया, उसके बाद अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए 50,000 रुपये का लोन लिया। 2009 में, उन्हें बड़ा बढ़ावा मिला जब खादी ग्रामोद्योग ने उन्हें 5 लाख रुपये का लोन दिया, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

आज, 41 वर्ष की उम्र में, अंजुमनारा धनलक्ष्मी स्वयं सहायता समूह का नेतृत्व कर रही हैं, तथा अपने गांव और आस-पास के क्षेत्रों की 450 से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने में मदद कर उन्हें सशक्त बना रही हैं।

चादरों की कीमत 1,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये तक है

अंजुमनारा खूबसूरत बेडशीट बनाती हैं, जिनकी कीमत 1,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये तक होती है। उनके सबसे लोकप्रिय डिज़ाइन में भगवान राम और देवी सीता के जीवन को दर्शाया गया है, जिसकी बहुत मांग है। उनके समूह की महिलाएँ सूती और रेशमी साड़ियाँ, दुपट्टे, कुर्तियाँ, सूट, कुर्ते, स्टोल और ब्लाउज़ भी बनाती हैं। उनकी बारीक कढ़ाई वाली साड़ियाँ और सूट ग्राहकों को खास तौर पर पसंद आते हैं।    

अंजुमनआरा ने हरियाणा और मेले में पहली बार आने को लेकर अपनी उत्सुकता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेले में भाग लेना एक अद्भुत अनुभव रहा, जिससे उन्हें पूरे भारत की विविध संस्कृतियों के बारे में जानने का मौका मिला।

उन्होंने ऐसे शानदार कार्यक्रम के आयोजन के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया तथा कहा कि वे इस आयोजन को हमेशा याद रखेंगी।

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