21वीं सदी में दुनिया का सिरमौर बनेगा भारत - सहकारिता मंत्री डॉ अरविंद शर्मा
चंडीगढ़, 08 मार्च (अभी) - हरियाणा के सहकारिता व पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा है कि 21वीं सदी में भारत दुनिया का सिरमौर बनेगा। इसके लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी न केवल नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू कर रहे हैं, अपितु देश की युवा शक्ति की प्रतिभा, क्षमता को निखारते हुए अनुकूल माहौल देने के लिए प्रभावी कदम उठा रहे हैं। उन्होंने वर्तमान युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वो इस वातावरण में देश व समाज के उत्थान में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करे।
डॉ. अरविंद शर्मा आज झज्जर के राजकीय पीजी नेहरू कॉलेज में आयोजित दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अपना संबोधन दे रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
उन्होंने समारोह के दौरान स्नातकोत्तर व स्नातक उतीर्ण कर चुके 1195 छात्र -छात्राओं को डिग्री प्रदान करते हुए जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. अरविंद शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई देते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प है, जिसे हरियाणा में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सिद्धि तक लेकर जाने के लिए काम किया जा रहा है। आज हर क्षेत्र में महिलाएं मेहनत के बलबूते पर प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
उन्होंने सभी डिग्री हासिल करने छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि डिग्री लेना बहुत बड़ी बात है, डिग्री मिलने से केवल विद्यार्थी ही नहीं उनके माता-पिता भी फक्र महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि 21वीं सदी का भारत दुनिया का सिरमौर बने। आज मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया,स्टैंड अप इंडिया,स्टार्टअप,मेक फार आल सरीखे कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा रहा हैं। इन सब कार्यक्रमों का आधार स्किल इंडिया है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि युवाओं को उनकी क्षमता के अनुकूल आगे बढ़ने के अवसर देने के लिए ऐसी शिक्षा नीति को तैयार किया गया है, जो उन्हें अनुकूल माहौल देगी। नई शिक्षा नीति युवाओं को उनकी रुचि के अनुरूप विषयों को पढ़ने, रचनात्मक तरीके से सीखने व कुशल बनने के लिए प्रेरित करेगी।
डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सपने आपके अपने नहीं, बल्कि माता पिता के भी होते हैं। जीवन में कामयाबी तभी मिलती है, जब विद्यार्थी अपने माता पिता व गुरुजनों के सपनों को साकार करे।