क्यों आसमान छू रही हैं सोना-चांदी की कीमतें? आइए जानते हैं कारण.............
K.K
पिछले कुछ वर्षों में देश और दुनिया भर में सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तेज़ी देखने को मिल रही है। कभी सोना नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच रहा है तो कभी चांदी ऐतिहासिक ऊँचाई छू रही है। आम लोगों से लेकर निवेशकों तक के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सोना और चांदी इतने महंगे क्यों हो रहे हैं। इसके पीछे केवल एक कारण नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ, राजनीतिक अस्थिरता, महंगाई, औद्योगिक मांग और निवेशकों की मानसिकता जैसे कई कारक जिम्मेदार हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय एक अनिश्चित दौर से गुजर रही है। कोविड-19 महामारी के बाद से कई देश आर्थिक रूप से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। अमेरिका और यूरोप में मंदी की आशंका बनी हुई है, चीन की आर्थिक वृद्धि धीमी हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता का माहौल है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम भरे निवेश जैसे शेयर बाजार से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। सोना और चांदी सदियों से सुरक्षित निवेश माने जाते रहे हैं, इसलिए जब भी बाजारों में डर या अनिश्चितता बढ़ती है, इन धातुओं की मांग स्वतः बढ़ जाती है, जिससे उनकी कीमतें ऊपर चली जाती हैं।
दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव भी सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में लगातार बढ़ता तनाव और अन्य क्षेत्रीय विवादों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता पैदा कर दी है। युद्ध की स्थिति में शेयर बाजार और अन्य जोखिमपूर्ण निवेश प्रभावित होते हैं, जबकि सोना और चांदी निवेशकों को सुरक्षा का एहसास कराते हैं। जैसे ही किसी बड़े राजनीतिक या सैन्य संकट की खबर आती है, बाजार में सोने की खरीद बढ़ जाती है और उसकी कीमतों में तेजी देखी जाती है।
महंगाई भी सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि का एक बड़ा कारण है। जब महंगाई बढ़ती है, तो मुद्रा की क्रय शक्ति घट जाती है और लोगों का पैसा पहले जितना मूल्यवान नहीं रह जाता। ऐसे में लोग अपने धन की वास्तविक कीमत को बचाने के लिए सोने और चांदी में निवेश करना बेहतर समझते हैं। इतिहास गवाह है कि महंगाई के दौर में सोना हमेशा मजबूत रहा है। हाल के वर्षों में अमेरिका, यूरोप और भारत सहित कई देशों में महंगाई ऊँचे स्तर पर रही है, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की मांग पर पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत अमेरिकी डॉलर में तय होती है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए सोना सस्ता हो जाता है, जिससे उसकी मांग बढ़ती है। हाल के समय में अमेरिकी अर्थव्यवस्था, कर्ज़ और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण डॉलर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। डॉलर की कमजोरी ने भी सोने और चांदी की कीमतों को सहारा दिया है।
केंद्रीय बैंकों की नीतियाँ भी सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करती हैं। जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो बैंक जमा और बॉन्ड जैसे निवेश आकर्षक नहीं रह जाते। ऐसे समय में निवेशक सोने और चांदी की ओर झुकते हैं। इसके अलावा, दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर सोने की खरीद की है। चीन, रूस, भारत और तुर्की जैसे देशों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने का भंडार बढ़ाया है। केंद्रीय बैंकों की इस भारी खरीदारी से बाजार में सोने की उपलब्धता घटती है और कीमतें ऊपर जाती हैं।
चांदी की कीमतों में तेजी का एक अहम कारण उसकी बढ़ती औद्योगिक मांग है। चांदी का उपयोग केवल आभूषण या निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल उपकरण और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रही है। दुनिया भर में नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों पर बढ़ते जोर ने चांदी की मांग को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया है। इस औद्योगिक मांग के कारण चांदी की कीमतों में भी तेज़ उछाल देखने को मिल रहा है।
सोना और चांदी सीमित प्राकृतिक संसाधन हैं और इनका उत्पादन अनंत नहीं है। खनन की लागत बढ़ने, पर्यावरणीय नियमों के सख्त होने और नई खदानों की कमी के कारण आपूर्ति में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर, निवेश और औद्योगिक दोनों ही क्षेत्रों में मांग लगातार बढ़ रही है। मांग और आपूर्ति के इस असंतुलन का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है और सोना-चांदी लगातार महंगे होते जाते हैं।
भारत में भी सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले घरेलू कारण हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। शादी-ब्याह, त्योहारों और पारंपरिक निवेश के कारण यहाँ सोने की मांग हमेशा बनी रहती है। इसके अलावा, रुपये में कमजोरी, आयात शुल्क और जीएसटी भी घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों को बढ़ा देते हैं।
निवेशकों की मनोवैज्ञानिक सोच भी कीमतों में तेजी लाने का काम करती है। जब लोग देखते हैं कि सोना और चांदी लगातार महंगे हो रहे हैं, तो उन्हें डर होता है कि कहीं मौका हाथ से न निकल जाए। इस सोच के चलते लोग और अधिक खरीदारी करने लगते हैं, जिससे मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं।
कुल मिलाकर, सोना और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक अनिश्चितता, युद्ध और राजनीतिक तनाव, महंगाई, डॉलर की स्थिति, केंद्रीय बैंकों की नीतियाँ, औद्योगिक मांग और सीमित आपूर्ति जैसे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं। जब तक दुनिया में आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता बनी रहेगी, तब तक सोना और चांदी निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बने रहेंगे और उनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ ऊँचे स्तर देखने को मिलते रहेंगे।