मोदी–पुतिन–जिनपिंग" की ट्रायो अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के लिहाज़ से बहुत अहम मायने रखती है। इसमें है तीन बड़े पावर सेंटर
भारत (मोदी), रूस (पुतिन) और चीन (जिनपिंग) एशिया की तीन बड़ी ताकतें हैं। यह एशिया का शक्ति संतुलन है । इनका आपसी समीकरण एशिया में शक्ति संतुलन तय करता हैं । अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबदबे के बीच यह तिगड़ी एक वैकल्पिक धुरी बना सकती है। BRICS और SCO जैसे मंचों पर इनका साथ मिलकर निर्णय लेना पश्चिम के लिए चुनौती बनता है।
भारत–रूस संबंध ऐतिहासिक रूप से मज़बूत रहे हैं (रक्षा, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी)।
चीन–रूस संबंध हाल के वर्षों में अमेरिका के विरोध के चलते और नज़दीक हुए हैं।
भारत–चीन संबंध सीमाई विवादों और प्रतिस्पर्धा के बावजूद आर्थिक दृष्टि से गहरे जुड़े हुए हैं।
चीन मैन्युफैक्चरिंग और निवेश शक्ति है।
भारत बड़ा बाज़ार और टेक्नोलॉजी/सेवा क्षेत्र का केंद्र है।
तीनों का गठजोड़ वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
यह तिगड़ी पश्चिम को संकेत दे रही है कि "मल्टीपोलर वर्ल्ड" (बहुध्रुवीय विश्व) की हकीकत मज़बूत हो रही है।
अमेरिका और NATO की नीतियों का मुकाबला करने के लिए इनका सहयोग अहम है।
कुल मिलाकर, यह तिगड़ी सिर्फ दोस्ती या तस्वीर भर नहीं है, बल्कि विश्व व्यवस्था के भविष्य में बड़ी भूमिका निभाने वाली शक्ति समीकरण का प्रतीक है।