सबसे खराब लिंगानुपात वाले 5 जिलों के सीएमओ की पीएनडीटी शक्तियां ली जाएंगी वापस
चंडीगढ़, 29 जुलाई (अभी) - हरियाणा की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती सिंह राव के निर्देश पर हरियाणा में लिंगानुपात में सुधार के लिए राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) की साप्ताहिक बैठक आज यहां स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में अवैध गर्भपात पर अंकुश लगाने तथा ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत राज्य के लिंगानुपात में और सुधार लाने के प्रयासों को तेज करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अवैध गर्भपात के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें दोषी पाए गए डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द करना और ऐसे सभी केंद्रों/क्लिनिकों को सील करना शामिल है, जो इस तरह के कदाचार में शामिल पाए जाते हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे अस्पतालों और केन्द्रों को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध करने से हटा दिया जाए तथा ऐसे केन्द्रों को दी जाने वाली अन्य सरकारी सुविधाएं भी बंद कर दी जाएं।
उन्होंने कहा कि राज्य सभी मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) और 12 सप्ताह से अधिक के गर्भपात के मामलों में रिवर्स ट्रैकिंग लागू कर रहा है, विशेषकर जहां महिलाओं की पहले से ही एक या अधिक बेटियां हैं। पिछले सप्ताह रिवर्स ट्रैकिंग के संदिग्ध मामलों में 10 और एफआईआर दर्ज की गईं।
बैठक में बताया गया कि 15 जिलों में पिछले वर्ष की तुलना में लिंगानुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो छापेमारी और डेकोय ओपरेशन जैसे लगातार क्षेत्रीय अभियानों का परिणाम है। हालांकि, पांच जिलों अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, पलवल और सिरसा ने उम्मीद से कम प्रदर्शन किया है और पिछले वर्ष की तुलना में लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई है। सख्त कार्रवाई के आदेश देते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि पीएनडीटी अधिनियम के तहत इन पांच जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) की सभी शक्तियां वापस ले ली जाएं और पड़ोसी जिलों के सीएमओ को दे दी जाएं।
#haryana #india #goverment #sexratio #healthdepartment #news