भारत में नई श्रम संहिताएं और श्रमिकों का भविष्य................
भारत में नई श्रम संहिताएं और श्रमिकों का भविष्य………….
भारत लंबे समय से एक श्रम-प्रधान अर्थव्यवस्था वाला देश रहा है, जहाँ कृषि, निर्माण, परिवहन, उद्योग, घरेलू सेवा, स्वास्थ्य, मनोरंजन तथा अन्य असंगठित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं। देश के विकास की गति श्रमिकों के योगदान पर ही टिकी हुई है, लेकिन विडंबना यह है कि आज़ादी के बाद दशकों तक श्रमिक सुरक्षा और अधिकारों को लेकर कोई प्रभावी, पारदर्शी और सार्वभौमिक व्यवस्था नहीं बन पाई। विभिन्न कालखंडों में श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए कई कानून तो बने, लेकिन उनकी जटिलता, कार्यान्वयन में असमानता और आधुनिक बदलते उद्योगों की आवश्यकताओं के कारण वे अप्रभावी साबित होने लगे। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने श्रम सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार प्रमुख संहिताएं लागू करने का निर्णय लिया। वर्ष 2025 तक इन संहिताओं के पूर्ण रूप से लागू होने की उम्मीद की जा रही है, जिनसे श्रमिकों के जीवन में व्यापक बदलाव आएगा।
श्रम सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम
भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत चार नई श्रम संहिताएं हैं— वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य-स्थिति संहिता 2020। इन संहिताओं का प्रमुख उद्देश्य श्रमिकों को मूलभूत अधिकार उपलब्ध कराना, कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना, असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना तथा उद्योगों को एक सरल और लचीला वातावरण प्रदान करना है। पुराने 29 नियमों के स्थान पर संहिताओं के लागू होने से कानून में मौजूद जटिलता, और अलग-अलग क्षेत्रों में असमान व्यवहार की समस्याएं दूर होंगी। यह एक ऐसा बदलाव है जो श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को लाभ पहुंचाएगा।
श्रमिकों की वर्तमान स्थिति और सुधार की आवश्यकता
भारत में लगभग 90 प्रतिशत से अधिक श्रमिक असंगठित क्षेत्र से संबंधित हैं। इनमें दैनिक मजदूरी करने वाले, निर्माण श्रमिक, घरेलू कामगार, कृषि मजदूर, रिक्शा चालक, छोटे दुकानों के कर्मचारी, डिलीवरी कर्मी, आदि शामिल हैं। इन श्रमिकों के पास रोजगार की सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा, न्यूनतम वेतन की गारंटी और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं नहीं होतीं। कई बार मजदूरों को दुर्घटना, बीमारी या बुढ़ापे में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है, क्योंकि उनके पास बचत या पेंशन नहीं होती। महिलाओं के लिए कार्यस्थल पर असुरक्षा व मातृत्व लाभ की कमी एक और बड़ी चुनौती रही है। इन समस्याओं को देखते हुए श्रम संहिताओं का निर्माण समय की आवश्यकता बन गया था।
वेतन संहिता 2019: एक राष्ट्र, एक वेतन प्रणाली
वेतन संहिता 2019 का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य पूरे भारत में न्यूनतम वेतन का एक समान प्रावधान लागू करना है। इससे किसी भी क्षेत्र या राज्य में श्रमिकों के साथ वेतन के मामले में भेदभाव नहीं किया जा सकेगा। यह संहिता वेतन भुगतान में पारदर्शिता और सुनिश्चितता लाएगी। साथ ही समय पर वेतन देना अब नियोक्ताओं की कानूनी जिम्मेदारी होगी। इससे उन श्रमिकों को विशेष राहत मिलेगी जिन्हें अक्सर समय पर मजदूरी नहीं मिलती थी या जिनका वेतन अनुचित कारणों से काट लिया जाता था।
औद्योगिक संबंध संहिता 2020: विवादों का समाधान और सामंजस्य
उद्योगों में अक्सर श्रमिक-नियोक्ता संबंध कमजोर हो जाते हैं, जिसके कारण हड़ताल, तालाबंदी, उत्पादन रुकना और रोजगार अस्थिरता जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। औद्योगिक संबंध संहिता 2020 का उद्देश्य श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच संतुलन स्थापित करना है। इसमें श्रमिक संगठनों की रजिस्ट्री, हड़ताल-नियमों की स्पष्टता, विवादों के समाधान के लिए संस्थागत प्रावधान और उद्योगों में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है। इससे उद्योगों को स्थायित्व मिलेगा और श्रमिकों को उनके अधिकारों की सुरक्षा का विश्वास भी।
सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020: असंगठित श्रमिकों के लिए वरदान
सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 भारत के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों श्रमिकों के लिए एक बहुत बड़ा कदम है। इसके तहत ईएसआईसी, ईपीएफ, पेंशन, मातृत्व लाभ, विकलांगता सहायता और मृत्यु लाभ जैसी सुविधाएं अब असंगठित और गिग वर्करों तक भी पहुंचेंगी। ऑनलाइन पंजीकरण के माध्यम से श्रमिकों की पहचान और डेटा तैयार किया जाएगा, जिससे सरकारी योजनाएं सीधे श्रमिकों तक पहुंचेंगी। यह कानून श्रमिकों को उनके भविष्य के लिए सुरक्षा प्रदान करेगा, जिससे अचानक संकट आने पर उन्हें आर्थिक असुरक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
व्यावसायिक सुरक्षा संहिता 2020: कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मान
कई बार निर्माण कार्य, खदान, फैक्टरी और अन्य कार्यस्थलों पर दुर्घटनाएँ होती हैं जिनमें श्रमिकों को गंभीर चोटें पहुंचती हैं या उनकी मृत्यु तक हो जाती है। व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-स्थिति संहिता 2020 कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाने पर जोर देती है। नियोक्ताओं को श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य जांच और सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यह संहिता खासतौर पर उन उद्योगों में महत्वपूर्ण है जहाँ काम के दौरान जोखिम अधिक रहता है।
आर्थिक विकास पर प्रभाव
नई श्रम संहिताओं से भारत की अर्थव्यवस्था को कई सकारात्मक प्रभाव मिलेंगे। पहला, इन कानूनों से निवेश बढ़ेगा, क्योंकि उद्योगों को एक सरल और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था मिलेगी। दूसरा, श्रमिकों की उत्पादकता बढ़ेगी, क्योंकि सुरक्षा, वेतन और सामाजिक सुरक्षा मिलने से उनका मनोबल बढ़ेगा। तीसरा, संगठित रोजगार बढ़ेगा, जिससे देश में बेरोजगारी कम होगी। चौथा, श्रम बल के डेटा के डिजिटलीकरण से योजनाएं प्रभावी रूप से लागू होंगी, जिससे सरकारी खर्च में पारदर्शिता आएगी।
चुनौतियाँ और सुधार की दिशा
हालाँकि इन श्रम संहिताओं को पूरी तरह सफल बनाने के लिए केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके क्रियान्वयन में कई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं, जैसे— सभी राज्यों में समान रूप से लागू होना, श्रमिकों का पंजीकरण, नियोक्ताओं द्वारा नियमों का पालन, और जागरूकता की कमी। इसलिए सरकार, उद्योग और समाज को मिलकर इन संहिताओं को सफल बनाना होगा। श्रमिक शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, पारदर्शी निरीक्षण प्रणाली तथा शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना आवश्यक होगा।
नई श्रम संहिताएं भारत के श्रमिक वर्ग के लिए एक नई उम्मीद का प्रतीक हैं। इनसे न केवल श्रमिकों का जीवन सुरक्षित और सम्मानपूर्ण बनेगा, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। ये संहिताएं विकास, समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि इनका प्रभावी क्रियान्वयन किया गया, तो भारत आने वाले वर्षों में एक अधिक सुरक्षित, उत्पादक और समावेशी श्रम बाजार के रूप में उभर सकता है। श्रमिक ही राष्ट्र निर्माण की धुरी हैं और इन संहिताओं से उन्हें मिलने वाले अधिकार निश्चित रूप से भारत को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाएंगे।
K.K.