07/12/25

बदलती दुनिया में भारत और रूस की साझेदारी..............

बदलती दुनिया में भारत और रूस की साझेदारी..............

आज दुनिया तेजी से बदल रही है। वैश्वीकरण, उन्नत तकनीक, क्षेत्रीय संघर्ष, आर्थिक हितों की प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चुनौतियाँ अंतरराष्ट्रीय संबंधों का नया स्वरूप तैयार कर रही हैं। इन वैश्विक परिस्थितियों में भारत और रूस की साझेदारी एक ऐसे मजबूत संबंध का उदाहरण है, जिसकी जड़ें दशकों पुरानी हैं और जो केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सामरिक विश्वास और सम्मान पर आधारित है। यह संबंध समय के साथ और अधिक सुदृढ़ हुआ है और भविष्य में भी इसकी महत्ता बनी रहेगी।

भारत और रूस के संबंधों की शुरुआत शीत युद्ध काल से मानी जाती है। उस दौरान भारत ने गुटनिरपेक्ष नीति अपनाई, फिर भी सोवियत संघ ने भारत का भरोसेमंद सहयोगी बनकर साथ दिया। 1971 में भारत–सोवियत शांति और मैत्री संधि ने इस संबंध को मजबूती दी, और पाकिस्तान–भारत युद्ध के समय रूस ने खुले तौर पर भारत का समर्थन किया। सोवियत संघ के विघटन के बाद कुछ चुनौतियाँ उभरीं, परंतु वर्ष 2000 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को “विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के रूप में पुनर्स्थापित किया।

रूस भारत की रक्षा क्षमताओं का प्रमुख स्तंभ है। आज भी भारतीय सैन्य संसाधनों का बड़ा हिस्सा रूसी तकनीक पर आधारित है। भारतीय सेना के टैंक, वायु सेना के सुखोई विमान, नौसेना की पनडुब्बियाँ और मिसाइलें रूस के सहयोग का परिणाम हैं। भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्राह्मोस मिसाइल विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। S-400 रक्षा प्रणाली ने भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाया है। रूस भारत को केवल हथियार ही नहीं देता, बल्कि तकनीक भी साझा करता है, जिससे भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है।

ऊर्जा के क्षेत्र में भी रूस भारत का विश्वसनीय साझेदार है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा रूस से आयात करता है। रूस से कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और कोयले की आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाती है। तमिलनाडु में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत–रूस सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके अलावा भविष्य में कई नए परमाणु संयंत्रों की स्थापना पर भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। साइबेरिया और आर्कटिक क्षेत्र में खनिज और तेल संसाधनों के विकास में भारत निवेश बढ़ा रहा है।

विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में भी भारत–रूस सहयोग बढ़ रहा है। अंतरिक्ष क्षेत्र में रूस भारत का पारंपरिक साझेदार रहा है। गगनयान मिशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को रूस प्रशिक्षण दे रहा है। मेडिकल, इंजीनियरिंग और अनुसंधान क्षेत्रों में भारतीय छात्र बड़ी संख्या में रूस में अध्ययन करते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, नैनो टेक्नोलॉजी और फार्मा अनुसंधान में दोनों देश संयुक्त परियोजनाएँ चला रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग और भी गहरा होता जा रहा है।

आज वैश्विक राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। अमेरिका, चीन, यूरोप और मध्य-पूर्व के बीच शक्ति संतुलन बदल रहा है। भारत और रूस दोनों ऐसे समय में अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखने पर जोर देते हैं। भारत अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहा है, परंतु रूस को छोड़ना उसके लिए व्यावहारिक नहीं है। वहीं रूस चीन के करीब है, पर भारत को वह संतुलित साझेदार मानता है। इस प्रकार यह साझेदारी दोनों देशों को एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संतुलन देने में मदद करती है।

आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में भी वृद्धि की संभावनाएँ बहुत अधिक हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार अपेक्षाकृत कम है, लेकिन इसे कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, दवा उद्योग, 5G/6G तकनीक, साइबर सुरक्षा, रत्न और कीमती धातुओं के व्यापार के माध्यम से काफी बढ़ाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) और चाबहार बंदरगाह सहयोग भविष्य में व्यापार को और गति प्रदान करेगा। इससे भारत और रूस एशिया, यूरोप और मध्य-पूर्व तक व्यापारिक पहुंच मजबूत कर पाएंगे।

सांस्कृतिक दृष्टि से भी दोनों देशों में पारस्परिक सम्मान दिखाई देता है। रूस में भारतीय योग, आयुर्वेद और फिल्मों की लोकप्रियता काफी अधिक है। वहीं भारत में रूसी साहित्यकारों जैसे टॉल्सटॉय, दोस्तोएव्स्की और मैक्सिम गोर्की को सम्मान दिया जाता है। यह सांस्कृतिक सम्बन्ध दोनों राष्ट्रों के जनता–जनता संबंधों को मजबूत बनाते हैं, जो कूटनीति की नींव को और ठोस करते हैं।

हालाँकि, वैश्विक परिस्थितियों में कुछ चुनौतियाँ भी सामने हैं। रूस–यूक्रेन संघर्ष, अमेरिका और पश्चिमी देशों का दबाव, चीन–रूस की नज़दीकी और ऊर्जा–तकनीकी प्रतिस्पर्धा, ऐसे मुद्दे हैं जो भारत–रूस संबंधों को सतर्कता के साथ आगे बढ़ाने की मांग करते हैं। फिर भी, दोनों देशों के बीच विश्वास, आपसी हित और भौगोलिक रणनीतिक महत्व के कारण यह साझेदारी आने वाले दशकों में भी मजबूत बनी रहेगी।

निष्कर्ष

बदलती वैश्विक राजनीति में भारत और रूस का संबंध केवल आवश्यकता नहीं, बल्कि विश्व शांति, स्थिरता और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह साझेदारी राजनीति या रक्षा समझौतों तक सीमित नहीं, बल्कि ऊर्जा, विज्ञान, शिक्षा, व्यापार और संस्कृति तक फैली है। भारत और रूस की दोस्ती समय की हर कसौटी पर खरी उतरी है और आज भी मजबूती से खड़ी है। बदलते समय में यह संबंध न सिर्फ दोनों देशों के हित में है, बल्कि वैश्विक संतुलन को बनाए रखने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह मित्रता बदलती दुनिया की दिशा तय करने वाली साझेदारी है— न टूटने वाली, न झुकने वाली, बल्कि आगे बढ़ने वाली।.............

(के.के.)

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