20/07/26

हरियाणा में कारोबारी सुगमता बढ़ी, 21 प्रमुख सुधारों को मिली रफ्तार, मुख्य सचिव ने शेष सुधारों को समयबद्ध पूरा करने के निर्देश दिए

अभिकान्त, 20 जुलाई चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने प्रदेश में कारोबारी प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अनुपालन में कमी (कम्प्लायंस रिडक्शन) एवं विनियमन-सरलीकरण (डी-रेग्यूलेशन) अभियान के तहत 28 प्राथमिकता वाले सुधारों में से 21 सुधारों को स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार के इस अभियान में हरियाणा अग्रणी राज्यों में शुमार हो गया है।

 

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आज यहां एक उच्चस्तरीय बैठक में इन सुधारों की समीक्षा की।

 

बैठक में मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि शेष सुधारों को निर्धारित समय-सीमा में लागू किया जाए तथा उनकी प्रगति से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य समय पर एमआईएस पोर्टल पर अपलोड किए जाएं, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा की उपलब्धियां सही रूप में परिलक्षित हो सकें।

 

मुख्य सचिव ने कहा कि हरियाणा सरकार का उद्देश्य ऐसा नियामक ढांचा विकसित करना है जो पारदर्शी, प्रौद्योगिकी आधारित और उद्योगों के अनुकूल हो। इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा तथा राज्य में कारोबार करने की सुगमता में और सुधार होगा।

 

बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार के डी-रेग्यूलेशन सेल द्वारा छह प्रमुख सुधारों को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को सरल एवं त्वरित बनाना, दुकानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए नियमों का उदारीकरण, सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता, हरियाणा सेवा का अधिकार व्यवस्था के तहत ऑटो-अपील प्रणाली, पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया में सुधार तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए जांच सुविधाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।

 

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि विभिन्न विभागों द्वारा 15 अन्य सुधारों पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इनमें भूमि उपयोग नियमों का उदारीकरण, औद्योगिक प्लॉटों के प्रबंधन में अधिक लचीलापन, भवन निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया का सरलीकरण, वैश्विक मानकों के अनुरूप अग्नि सुरक्षा नियम लागू करना, स्वास्थ्य क्षेत्र में लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाना, राज्य के कानूनों एवं नियमों का डिजिटलीकरण तथा निवेश को प्रोत्साहित करने वाले उपाय शामिल हैं।

 

उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) ने उद्योगों की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें औद्योगिक भूखंडों का विभाजन एवं एकीकरण, पूर्व अनुमति के बिना औद्योगिक परियोजनाओं में परिवर्तन की सुविधा, दस वर्ष बाद लीजहोल्ड को फ्रीहोल्ड में परिवर्तित करने की व्यवस्था, लचीले लीज नियम तथा भूमि के बेहतर उपयोग के लिए उदार विकास नियम शामिल हैं।

 

बैठक में यह भी बताया गया कि उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने हरियाणा राइट टू बिजनेस विधेयक, 2026 का प्रारूप तैयार कर लिया है। प्रस्तावित विधेयक के तहत पात्र विनिर्माण एमएसएमई इकाइयों को स्व-घोषणा के आधार पर सैद्धांतिक स्वीकृति प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा तथा राज्य सरकार के विभागों द्वारा निरीक्षण से तीन वर्ष तक की छूट का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर (एचईपीसी) को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी तथा जिला स्तरीय स्वीकृति समितियों को सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध अनुमोदन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

 

नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र, जो नियंत्रित क्षेत्रों से बाहर है, में कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में परिवर्तित करने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। विभाग नियंत्रित क्षेत्रों में भी बिना मानवीय हस्तक्षेप के सिस्टम जनरेटेड सीएलयू स्वीकृति की दिशा में कार्य कर रहा है।

 

अग्निशमन सेवा विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022 में संशोधन कर जोखिम आधारित अग्नि सुरक्षा मानकों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप लागू करने की प्रक्रिया जारी है।

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