उत्तराखंड : सरकारी स्कूलों और मदरसों में बच्चे पढ़ेंगे राज्य आंदोलन का इतिहास
उत्तराखंड, 04 मार्च (अभी): प्रदेश के सरकारी, सहायता प्राप्त विद्यालयों एवं मान्यता प्राप्त मदरसों के कक्षा 6 से 8वीं तक के छात्र राज्य आंदोलन के इतिहास के साथ ही अपनी विरासत और विभूतियों के बारे में पढ़ेंगे। धामी कैबिनेट ने हमारी विरासत एवं विभूतियां सहायक पुस्तिका को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पुस्तिका में छात्र-छात्राएं श्रीदेव सुमन, तीलू रौतेली समेत कई महान विभूतियों के बारे में पढ़ेंगे। वहीं, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी यह पुस्तिका एक आधार बनेगी। इस पुस्तक के माध्यम से बच्चों को चौंदकोट जनशक्ति मार्ग की गाथा भी पढ़ने को मिलेगी। पुस्तक निर्माण में समन्वयक सुनील भट्ट बताते हैं कि पौड़ी जिले में 33 किमी का यह मार्ग सामुदायिक सहभागिता और श्रमदान का बड़ा उदाहरण है। इसके साथ ही वर्ष 1951 में टिहरी जिले के बूढ़ाकेदार की साझा चूल्हे की कहानी भी इस पुस्तिका के माध्यम से बच्चों को पढ़ने को मिलेगी।विज्ञापन
जिसमें धर्मानंद नौटियाल, बहादुर सिंह राणा और भरपूर नगवाण तीनों ने एक साथ रहकर सामाजिक समरसता का बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया था। पुस्तक में भगवान राम का उत्तराखंड से जुड़ाव भी पढ़ने को मिलेगा। गढ़वाल से कुमाऊं तक राम मंदिर और उनकी पूजा शैली की जानकारी दी गई है। उत्तराखंड के पौड़ी जिले के सितोंस्यू में माता सीता का मंदिर है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यहां सीता माता ने भू समाधि ली थी। बच्चे अपने न्याय के देवता गोलज्यू के इतिहास को भी जानेंगे। वहीं, हमारी विशभूषा, व्यंजन, हमारे लोक नृत्य के बारे में भी पढ़ेंगे।