हरियाणा कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के खिलाफ CLU (Change of Land Use) के बदले पैसे मांगने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की गई है।

हरियाणा कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के खिलाफ CLU (Change of Land Use) के बदले पैसे मांगने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की गई है।

सीएलयू सीडी कांड निश्चित रूप से राव नरेंद्र सिंह की नैतिक छवि और उनकी पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी नैरेटिव के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है। उनकी नियुक्ति के बाद इस पुराने मामले का फिर से उठना निम्नलिखित कारणों से एक बड़ा झटका है:

यह कांड तब सामने आया जब राव नरेंद्र सिंह हरियाणा सरकार में मंत्री थे। उन पर 'चेंज ऑफ लैंड यूज़' (CLU) की अनुमति देने के बदले में करोड़ों रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है, जैसा कि इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) द्वारा जारी की गई कथित सीडी में दिखाया गया था।

यह मामला सिर्फ आरोप नहीं है; लोकायुक्त ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे, और अब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने अदालत में उनके खिलाफ चार्जशीट (आरोप पत्र) भी दाखिल कर दी है। कानूनी प्रक्रिया में यह कदम उनकी व्यक्तिगत नैतिकता पर एक गंभीर संदेह पैदा करता है।

राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति, जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप हों और जिसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी हो, उसकी व्यक्तिगत और सार्वजनिक छवि को धूमिल करती है।

कांग्रेस पार्टी अक्सर भ्रष्टाचार के मुद्दों पर दूसरी पार्टियों को घेरती रही है और एक स्वच्छ शासन का नैरेटिव प्रस्तुत करती है। ऐसे में, एक आरोपी नेता को इतना बड़ा पद देना पार्टी के दोहरे मापदंड को उजागर करता है। विपक्ष इसे तुरंत पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी दावे की ढोंग के रूप में पेश करता है।

आंतरिक विरोध: राव नरेंद्र सिंह की नियुक्ति पर पार्टी के भीतर भी कुछ नेताओं ने सवाल उठाए हैं, जिससे पता चलता है कि यह फैसला पार्टी की एकता और वैचारिक प्रतिबद्धता के लिए भी नुकसानदेह है।

चुनावी नुकसान: भ्रष्टाचार के आरोप चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बनते हैं। विपक्ष इस सीडी कांड को आगामी चुनावों में भुनाकर कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करेगा, जिससे पार्टी के जनाधार को नुकसान पहुंच सकता है।

संक्षेप में, यह कांड राव नरेंद्र सिंह के लिए तो एक व्यक्तिगत संकट है ही, लेकिन यह कांग्रेस के लिए भी एक बड़ी चुनौती है क्योंकि यह सीधे तौर पर उनके नैतिक आधार और राजनीतिक ईमानदारी के दावों को कमजोर करता है।

Previous

कांग्रेस का ये पैमाना रहा है कि जिसपर जितने ज्यादा भ्रष्टाचार का आरोप हो उसको उतना ही बड़ा पद दिया जाता है : ऊर्जा मंत्री अनिल विज

Next

“जो लाहौर में फेल, वो पिशौर में भी फेल”, राहुल गांधी की राजनीति खत्म हो गई है : ऊर्जा मंत्री अनिल विज