आजादी के बाद पहली बार होगी जातीय जनगणना: केंद्र सरकार ने दिए ऐतिहासिक फैसले के संकेत
जे कुमार नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026 : स्वतंत्रता के बाद भारत की जनसांख्यिकी से जुड़ा एक ऐतिहासिक फैसला सामने आने जा रहा है। देश में आगामी जनगणना (Census) के दौरान पहली बार लोगों की जाति संबंधी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। 1947 में आजादी मिलने के बाद से अब तक हुई जनगणनाओं में केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आंकड़े ही एकत्र किए जाते रहे हैं, लेकिन नए ढांचे के तहत सामान्य और अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) की जातिगत स्थिति का भी डेटा जुटाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इस विषय पर व्यापक सहमति और तकनीकी तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और राज्य सरकारों द्वारा जातिगत जनगणना कराने की मांग उठाई जा रही थी, ताकि देश में विभिन्न जातियों की वास्तविक संख्या और उनकी आर्थिक व सामाजिक स्थिति का सटीक आंकलन किया जा सके।
नीति निर्माण में मिलेगी मदद:
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से सरकार को आरक्षण, बजट आवंटन और सामाजिक कल्याण की योजनाओं को अधिक पारदर्शी और लक्षित (targeted) तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी। डिजिटल माध्यम से होने वाली इस जनगणना में आंकड़ों के त्वरित और सटीक विश्लेषण के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार जल्द ही जनगणना के नए प्रारूप, समय-सारणी और प्रश्नावली के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकती है।
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