09/04/25

उपायुक्त हर शुक्रवार को समाधान शिविरों पर साप्ताहिक समीक्षा बैठकें करेंगे: मुख्य सचिव

चंडीगढ़, 09 अप्रैल (अभी) – हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज सभी उपायुक्तों (डीसी) को निर्देश जारी किए कि वे समाधान शिविरों (शिकायत निवारण शिविरों) के दौरान दर्ज शिकायतों की स्थिति की समीक्षा के लिए हर शुक्रवार को समीक्षा बैठकें आयोजित करें। जन शिकायतों के समाधान के उद्देश्य से ये शिविर पूरे राज्य में हर सोमवार और गुरुवार को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आयोजित किए जा रहे हैं। जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक सचिव स्तर का एक अधिकारी मुख्यमंत्री के डैशबोर्ड हॉल से इन जिला स्तरीय समीक्षाओं की निगरानी करेगा।

यह निर्देश एक वीडियो कॉन्फ्रेंस मीटिंग के दौरान दिए गए, जिसमें मुख्य सचिव ने शिकायत निवारण शिविरों के कामकाज और रबी फसलों की चल रही खरीद की समीक्षा की। श्री रस्तोगी ने उपायुक्तों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि समाधान शिविरों में प्राप्त शिकायतों का तुरंत और नागरिकों की संतुष्टि के अनुसार समाधान किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा, "नियमित निगरानी और त्वरित कार्रवाई पूरे हरियाणा में शिकायतों से निपटने में पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार लाने की कुंजी है।"

शुक्रवार की समीक्षा बैठकों में पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त उपायुक्त, नगर आयुक्त, उप-मंडल अधिकारी (नागरिक) (मुख्यालय), एसडीओ (नागरिक), पुलिस उपाधीक्षक और संबंधित विभागों के प्रमुखों सहित प्रमुख जिला अधिकारियों को भी भाग लेना चाहिए, ताकि समस्या समाधान के लिए समन्वित दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) को निर्देश दिया कि वह उपायुक्तों के लिए एक पोर्टल विकसित करें, ताकि वे गांवों में रात्रि विश्राम के अनिवार्य कार्यक्रम के बारे में मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकें। इस अभ्यास का उद्देश्य ग्रामीणों के साथ घनिष्ठ संपर्क को बढ़ावा देना है।

निगरानी एवं समन्वय की विशेष सचिव डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि कल तक प्राप्त 1 लाख से अधिक शिकायतों में से 81% का समाधान कर दिया गया है। अंबाला और रेवाड़ी जैसे जिले 92% समाधान दर के साथ सबसे आगे हैं, इसके बाद फतेहाबाद, पलवल और रोहतक का स्थान है, जहां 88% समाधान दर है।

खरीद के मोर्चे पर मुख्य सचिव ने रबी फसलों के लिए परेशानी मुक्त खरीद प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "किसानों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना चाहिए और इस संबंध में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" उन्होंने अधिकारियों को मंडियों में निगरानी मजबूत करने, किसानों को व्यापक सहायता प्रदान करने और मंडियों से फसलों का सुचारू और समय पर उठाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

श्री रस्तोगी ने गेहूं की गुणवत्ता और सुचारू खरीद सुनिश्चित करने के लिए किसानों को गेहूं की नमी को अनुमेय सीमा के भीतर बनाए रखने के बारे में शिक्षित करने के प्रयास करने का भी आह्वान किया।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री आनंद मोहन शरण ने बताया कि कल तक मंडियों में 2,47,000 मीट्रिक टन (एमटी) गेहूं की खरीद हो चुकी है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में दर्ज 1,86,000 मीट्रिक टन से उल्लेखनीय वृद्धि है। इसके अतिरिक्त, 2,95,000 मीट्रिक टन सरसों की भी खरीद की गई है। किसानों को समय पर भुगतान की सुविधा के लिए, वित्त विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक ने रबी विपणन सीजन (आरएमएस) 2025-26 के दौरान गेहूं खरीद के लिए ₹6,653.44 करोड़ की नकद ऋण सीमा (सीसीएल) मंजूर की है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरूण कुमार गुप्ता तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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