21/08/26

राजस्थान से बंगाल तक 8 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में बदले नियम: अब जिला कलेक्टर देंगे भारतीय नागरिकता

जे कुमार नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026 : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती राज्यों में नागरिकता प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए देश के 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियम बदल दिए हैं। नई अधिसूचना के अनुसार, अब संबंधित जिलों के जिलाधिकारी (कलेक्टर) योग्य आवेदकों की नागरिकता याचिकाओं पर विचार करेंगे और उन्हें भारतीय नागरिकता प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए अधिकृत होंगे।

इस संशोधन का सबसे बड़ा असर प्रक्रिया के सरलीकरण पर पड़ेगा। इससे पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) या नागरिकता कानून के तहत आवेदनों की प्रोसेसिंग के लिए केंद्र सरकार द्वारा नामित 'सशक्त समितियां' कार्य कर रही थीं, लेकिन अब यह शक्ति सीधे जिला कलेक्टर को सौंप दी गई है।

किन्हें मिलेगा लाभ और क्या होगी प्रक्रिया:

  • लक्षित लाभार्थी: पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) के वे आवेदक जिन्होंने निर्धारित नियमों के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया है।

  • कलेक्टर की शक्तियां: जिला कलेक्टर आवेदनों की समीक्षा करेंगे, आवश्यकतानुसार जांच/पूछताछ कराएंगे और आवेदक के उपयुक्त पाए जाने पर उन्हें पंजीकरण या देशीयकरण (Naturalisation) के माध्यम से भारत की नागरिकता प्रदान करेंगे।

  • जनजातीय क्षेत्रों को छूट: असम और त्रिपुरा के संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले जनजातीय (Tribal) क्षेत्रों को इस आदेश के दायरे से बाहर रखा गया है।

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