छात्रों को नौकरी चाहने वालों की बजाय नौकरी प्रदाता बनना चाहिए: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू
चंडीगढ़, 10 मार्च (अभी) - पीएचडी डिग्री व अन्य पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में आधे से अधिक छात्राएं हैं, जो न केवल हरियाणा बल्कि पूरे भारत के विकास का प्रमाण है। आज स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में 75 प्रतिशत से अधिक छात्राएं हैं और यह संतोष व गर्व की बात है कि हमारी बेटियां कृषि व संबद्ध विज्ञान सहित विविध क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान के प्रकाश से समाज व देश को आलोकित करना चाहिए।
यह बात भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के सभागार में आयोजित छठे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही।
इससे पहले महाराजा अग्रसेन हवाई अड्डे पर राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का प्रदेशवासियों की ओर से पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। विश्वविद्यालय पहुंचने पर राष्ट्रपति ने सबसे पहले पौधारोपण किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
राष्ट्रपति व अन्य अतिथियों ने मां शारदा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। समारोह के दौरान राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने पर्यावरण व सामाजिक एकता में महत्वपूर्ण योगदान के लिए श्री इंद्रेश कुमार को मानद उपाधि से सम्मानित किया।
श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे देश और समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। गुरु जम्भेश्वर जी एक महान संत और दार्शनिक थे। वे वैज्ञानिक सोच और पर्यावरण संरक्षण के समर्थक थे। उनका मानना था कि प्रकृति की रक्षा करना, सभी जीवों के प्रति दया और करुणा रखना तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान करना मनुष्य का नैतिक कर्तव्य है।
श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि विश्वविद्यालय की 30 साल की यात्रा में यहां के विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों ने विभिन्न शोध परियोजनाओं में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इनक्यूबेशन, स्टार्ट-अप और पेटेंट फाइलिंग शोध परियोजनाओं के लिए यहां विशेष विभाग बनाए गए हैं। ये सभी प्रयास यहां के विद्यार्थियों में नवाचार और उद्यमिता की भावना विकसित करके भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होंगे। देश के संतुलित और सतत विकास के लिए यह भी आवश्यक है कि शिक्षा और तकनीक का लाभ गांव-गांव तक पहुंचे। गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है।
राष्ट्रपति ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने गांव और शहर के लोगों को भी शिक्षा के महत्व के बारे में बताना चाहिए और उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करना चाहिए। समय की मांग के अनुसार शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव लाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की गई है। इस विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप हैं, जो विद्यार्थियों में मौलिक सोच और रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा देंगे और रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करेंगे।
उन्होंने कहा कि आज आपके जीवन की नई यात्रा शुरू हो रही है। इस यात्रा में चुनौतियाँ भी होंगी और अवसर भी। लगातार सीखते रहने और अपने कौशल को निखारते रहने से आप चुनौतियों को अवसर में बदल सकते हैं। छात्रों को नौकरी चाहने वाले बनने के बजाय नौकरी देने वाले बनना चाहिए।
हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय ने दीक्षांत समारोह में पदक और पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को तेजी से बदलते परिवेश में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए नवीनतम तकनीकों और रुझानों के प्रति जागरूक रहना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान और कौशल प्राप्त करने का साधन नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर नैतिकता, करुणा और सहिष्णुता जैसे जीवन मूल्यों को विकसित करने का भी माध्यम है।
इससे पहले विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने समारोह में राष्ट्रपति, राज्यपाल और कैबिनेट मंत्री श्री रणबीर गंगवा का स्वागत किया।