24/05/26

सुपवा के भावी आर्किटेक्ट्स का कमाल: ज्यूरी में पेश किए 'क्लाइमेट फ्रेंडली' और ऐतिहासिक शहरी मॉडल, नामी वास्तुकारों ने सराहा

जे कुमार रोहतक, 24 मई 2026: दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में चल रही वार्षिक ज्यूरी प्रक्रिया के तहत अब प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर फैकेल्टी के छात्रों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का लोहा मनवाया है। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे दिग्गज एक्सटर्नल एक्सपर्ट्स (बाहरी विशेषज्ञों) के सामने छात्रों ने ऐसे अनूठे और आधुनिक शहरी संरचना मॉडल (Urban Models) पेश किए, जिनमें ऐतिहासिक वास्तुकला की झलक के साथ-साथ पर्यावरण और जलवायु संवेदी (Climate-Responsive Architecture) सोच का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला।

ऐतिहासिक विरासतों से लेकर स्टील कंस्ट्रक्शन तक का जीवंत प्रदर्शन

प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर फैकेल्टी के एफसी अजयबाहू जोशी ने ज्यूरी की विस्तृत रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि अलग-अलग सेमेस्टर के छात्रों ने अपनी शैक्षणिक और रचनात्मक सीख को बेहद बारीकी से पोर्टफोलियो के जरिए पेश किया:

  • ऐतिहासिक किला ज़फरगढ़ पर प्रोजेक्ट (चौथा सेमेस्टर): छात्रों ने 'वर्नाक्युलर स्टूडियो' प्रोजेक्ट के तहत किला ज़फरगढ़ की ऐतिहासिक बस्ती का क्षेत्रीय दस्तावेजीकरण और विस्तृत साइट विश्लेषण किया। छात्रों ने पारंपरिक स्थानिक योजना और स्थानीय सामग्रियों का उपयोग कर ऐसे भौतिक मॉडल बनाए, जो इतिहास और आधुनिक वास्तुकला के बीच की खाई को पाटते नजर आए।

  • स्टील और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन (चौथा सेमेस्टर): इन छात्रों की ज्यूरी लेने पहुंचे प्रसिद्ध आर्किटेक्ट डॉ. प्रभजोत सिंह सग्गा ने छात्रों के काम को सराहा। छात्रों का मुख्य फोकस निर्माण सामग्री के रूप में 'स्टील' के अधिकतम उपयोग पर था। उन्होंने ट्रस, मेजानाइन फ्लोर, रोलिंग शटर और कोलेप्सिबल डोर के शानदार लाइव डिजाइन प्रदर्शित किए।

  • ग्राफिकल और डिजाइनिंग कला (द्वितीय वर्ष): इन नवोदित वास्तुकारों ने वॉटरकलर रेंडरिंग, पेंसिल रंग अनुप्रयोगों और पर्सपेक्टिव व्यूज के लिए डाइनामिक पेन स्केचिंग विधियों का बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिसे प्रमुख वास्तुकार खुर्रम अली ने खूब सराहा।

सीपीडब्ल्यूडी के पूर्व मुख्य वास्तुकार ने थपथपाई पीठ, दिए अनमोल टिप्स

छठे सेमेस्टर की 'वर्किंग ड्रॉइंग्स ज्यूरी' के मूल्यांकन के लिए सीपीडब्ल्यूडी (CPWD) के पूर्व मुख्य वास्तुकार रविंदर कुमार काकर विशेष रूप से यूनिवर्सिटी पहुंचे। दशकों का सरकारी और अकादमिक अनुभव रखने वाले काकर ने सुपवा के छात्रों के काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बताया।

इस ज्यूरी में छात्रों ने 20 अत्यंत विस्तृत शीट्स वाले व्यापक, स्टूडियो पर्यवेक्षित निर्माण पोर्टफोलियो प्रस्तुत किए। एक्सपर्ट ने छात्रों को रियल एस्टेट और सरकारी प्रोजेक्ट्स में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों से निपटने का अनमोल मार्गदर्शन भी दिया।

आधुनिक वाणिज्यिक डिजाइन और पैसिव एनर्जी रणनीतियों पर जोर

इसके अतिरिक्त, छठे सेमेस्टर के सीनियर छात्रों ने आधुनिक वाणिज्यिक प्रोग्रामिंग (Commercial Programming) पर आधारित प्रोजेक्ट्स सफलतापूर्वक प्रस्तुत किए। एक्सटर्नल एक्सपर्ट डॉ. ईवा पाराशर ने छात्रों द्वारा इस्तेमाल की गई अभिनव पैसिव रणनीतियों (Passive Cooling Strategies), ऊर्जा संवेदी तकनीकों और पर्यावरणीय प्रदर्शन की गहरी समझ की जमकर समीक्षा और प्रशंसा की।

ज्यूरी के समापन पर फैकेल्टी के प्रोफेसरों ने कहा कि सुपवा के छात्र जिस तरह से पर्यावरण के अनुकूल और हमारी ऐतिहासिक संस्कृति को सहेजने वाले नक्शे व मॉडल तैयार कर रहे हैं, वह यह साबित करता है कि आने वाले समय में ये छात्र देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को एक नई और सुरक्षित दिशा देंगे।

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