हिमाचल के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मंजूर किए 140.90 करोड़
हिमाचल,01 अप्रैल (अभी): प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) चरण-3 के तहत हिमाचल प्रदेश में 21 पुलों का निर्माण होगा। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इन पुलों के निर्माण के लिए 140.90 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसमें 126.81 करोड़ रुपये की राशि ग्रामीण विकास मंत्रालय और 14.09 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार वहन करेगी। इन पुलों के निर्माण से हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और मंडी जिलों में ग्रामीण संपर्क मार्ग सुदृढ़ होंगे। इन पुलों की लंबाई 970.772 मीटर रहेगी। हिमाचल में प्राकृतिक आपदा के चलते कई पुल ध्वस्त हो गए थे।
हमीरपुर जिले में बसी से सरकाघाट मार्ग पर चैंथ खड्ड, सीर खड्ड और लिंडी खड्ड पर पुलों का निर्माण होगा। इसके अलावा, बक्कर खड्ड, जमली खड्ड और घुडविन खड्ड पर पुल बनेंगे। जिले के अन्य महत्वपूर्ण पुलों में लाल घर नाला, मंजही खड्ड, देही खड्ड, धलियारा खड्ड, मनेड खड्ड और कहुली खड्ड पर पुलों का उन्नयन भी प्रस्तावित है। कांगड़ा जिले में मौल खड्ड पर 40 मीटर लंबा पीएससी बॉक्स गर्डर पुल बनाया जाएगा, जबकि कुल्लू जिले में संज खड्ड पर दो स्टील ट्रस पुलों का उन्नयन किया जाएगा।
लाहौल-स्पीति जिले में चौखांग नाला, चेनाब नदी, किशोरी नाला, तैलिंग नाला और मूरिंग नाला पर पुलों को अपग्रेड किया जाएगा। मंडी जिले में पंडोह में ब्यास नदी पर 110 मीटर लंबे डबल-लेन पुल बनेंगे। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इन परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की गई थी। उन्होंने कहा कि यह मंजूरी कुछ विशिष्ट शर्तों के साथ दी गई है ताकि निर्माण कार्य में उच्चतम गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
राज्य सरकार पुल निर्माण से पहले जलग्रहण क्षेत्र की गणना, हाइड्रोलिक डेटा, भू-तकनीकी जांच और संरचनात्मक डिजाइनों का सत्यापन करेगी। इसके अलावा, परियोजना कार्यान्वयन की निगरानी के लिए विशेषज्ञों से युक्त एक पुल प्रबंधन प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलों की गुणवत्ता जांच के लिए मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा, जिसमें पाइल इंटेग्रिटी टेस्ट और आईआरसी मानकों के अनुसार स्वीकृति भार परीक्षण शामिल होगा। उन्होंने कहा कि इन पुलों के निर्माण से दूरदराज के क्षेत्रों को सभी मौसमों में सड़क संपर्क मिलेगा, जिससे ग्रामीण समुदायों की आवाजाही सुगम होगी।